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परिवार की हत्या करने वाली बेटी और दामाद को फिर जाना पड़ेगा जेल

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, प्रक्रिया जारी रहेगी लेकिन इसे लागू नहीं किया जाएगा

Satyakhabarindia

 

सत्य खबर हरियाणा 

Reluram Pooniya Murder Case : हरियाणा के बरवाला से पूर्व विधायक रेलूराम और परिवार के हत्याकांड मामले में दोषी बेटी सोनिया और दामाद संजीव की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। साथ ही पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट को समय पूर्व हुई रिहाई पर दोबारा विचार करने के निर्देश दिए हैं। अब सोनिया और संजीव को 9 फरवरी को जेल जाना पड़ सकता है।
हाईकोर्ट ने 9 दिसंबर को उम्रकैद की सजा काट रहे संजीव और सोनिया को 2 महीने की अंतरिम जमानत दी थी। इसके बाद रेलूराम के भतीजों ने सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले तो को चुनौती दी थी। हांलाकि जस्टिस दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा कि कंटमप्रेरी अथॉरिटी द्वारा रिव्यू प्रोसेस जारी रहेगी, मगर अंतिम निर्णय को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। न ही इसे लागू किया जाएगा।
बता दें कि 23 अगस्त 2001 में हिसार के लितानी गांव में फॉर्म हाउस में सोनिया ने पति संजीव के साथ मिलकर प्रॉपर्टी के लालच में पिता रेलूराम पूनिया (50), उनकी पत्नी कृष्णा देवी (41), बच्चे प्रियंका (14), सुनील (23), बहू शकुंतला (20), पोता लोकेश (4) और दो पोतियों शिवानी (2) तथा 45 दिन की प्रीति की हत्या कर दी थी।
हिसार बार के सीनियर एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल ने बताया कि रेलूराम के भतीजों की अपील पर अब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है। इस मामले में अब सोनिया और संजीव की जमानत पर फैसले का अधिकार हाईकोर्ट के पास नहीं रहेगा। अब अगली सुनवाई में ही उनकी इसके बारे में कोई निर्णय होगा। 9 फरवरी को दोनों को दोबारा जेल जाना होगा।
एडवोकेट खेवाल ने बताया कि जब तक मामले में अगली सुनवाई नहीं होगी, तब तक सोनिया और संजीव की जमानत पर लिया गया कोई भी निर्णय प्रभावी नहीं रहेगा। अब सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी है। सभी पक्षों को नोटिस जारी किया गया है। इसके बाद अब सुप्रीम कोर्ट में 9 मार्च को दोबारा सुनवाई होगी।

2001 में बेटी-दामाद ने की थी 8 हत्याएं

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23 अगस्त 2001 को हिसार के लितानी गांव के फार्म हाउस में पूर्व विधायक की छोटी बेटी सोनिया ने जमीन के लालच में 8 हत्याएं कर दी थी। इसमें पिता रेलू राम पूनिया (50), उनकी पत्नी कृष्णा देवी (41), बच्चे प्रियंका (14), सुनील (23), बहू शकुंतला (20), पोता लोकेश (4) और दो पोतियों शिवानी (2) तथा 45 दिन की प्रीति की हत्या हुई थी।

2014 में सजा को उम्रकैद में बदला

इसके बाद रेलूराम के भतीजों की शिकायत पर पुलिस ने पानीपत से एक महीने बाद ही संजीव को गिरफ्तार कर लिया था। मामले में 2004 में हिसार डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने संजीव और सोनिया को फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा। इसके बाद 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने दया याचिका में देरी का हवाला देते हुए सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।

6 अगस्त, 2024 को दी सजा को चुनौती

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सोनिया और संजीव ने 6 अगस्त 2024 के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें कहा गया था कि संजीव को अपनी पूरी जिंदगी जेल में बितानी होगी। उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय कमेटी ने उनकी जेल में रहने के दौरान के व्यवहार, पढ़ाई, सुधार के लिए किए गए कामों और पुनर्वास योजनाओं पर ध्यान ही नहीं दिया।

हाईकोर्ट ने दिसंबर में दोनों को जमानत दी

इसके बाद सोनिया और संजीव ने हाईकोर्ट में जमानत याचिका फाइल की। हाईकोर्ट के आदेश पर 9 दिसंबर 2025 को दोनों को जमानत मिली थी। हांलाकि इसके बाद रेलूराम के दोनों भतीजों ने उकलाना थाने पहुंचकर अपनी जान को खतरा बताया था। इसके बाद डॉयल 112 की एक गाड़ी कई दिनों तक उनकी कोठी पर तैनात रही।

क्या है मामला

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रेलू राम पूनिया हत्याकांड हरियाणा के सबसे सनसनीखेज मामलों में माना जाता है। 23 अगस्त 2001 की रात हिसार के लितानी गांव स्थित फार्महाउस में पूर्व विधायक रेलू राम पूनिया, उनकी पत्नी, बेटा-बहू, पोता-पोती और एक बच्चे सहित कुल 8 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। सभी को लोहे की रॉड व डंडों से सोते समय मारा गया, जिससे पूरा परिवार खत्म हो गया।
जांच में सामने आया कि इस नरसंहार की मुख्य वजह जमीन-जायदाद को लेकर गंभीर विवाद था। रेलू राम की बेटी सोनिया और उसके पति संजीव ने परिवार की संपत्ति पर कब्जा करने की योजना बनाकर यह हत्याकांड अंजाम दिया। दोनों ने वारदात के बाद आत्महत्या का प्रयास भी किया, लेकिन बच गए। अदालत ने इसे “पूरी तरह योजना बनाकर की गई क्रूर हत्या” माना और 2004 में दोनों को मृत्युदंड सुनाया। बाद में हाईकोर्ट ने इसे उम्रकैद में बदला, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फिर से मौत की सजा बहाल कर दी। बाद की अपीलों और प्रक्रियाओं के बाद उनकी सजा उम्रकैद में बदल गई।
पुलिस पूछताछ में सोनिया ने बताया था कि हां, मैंने ही आठों को मारा है। ये लोग मुझसे और मेरे पति से नफरत करते थे। मुझे प्रॉपर्टी नहीं देना चाहते थे। उस रात सभी को मारने के बाद मैं खुद को भी खत्म करना चाहती थी। काश! मर गई होती। मां-पापा के बीच अक्सर लड़ाई होती थी। बात मारपीट तक पहुंच जाती थी। झगड़े की जड़ थी, जमीन-जायदाद, संपत्ति। पापा जब नशे में होते थे तो बोलते थे कि उनके भाई राम सिंह की पत्नी के साथ उनका अवैध संबंध है। चचेरी बहन रोजी भी मेरे पिता की बेटी है। मां के भी राम चंद्र दाहिया नाम के एक शख्स के साथ अवैध संबंध था। दाहिया की वजह से मां ने एक बार मुझ पर गोली भी चला दी थी, लेकिन मैं बच गई।

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